
“अनुशासन बनाए रखने के लिए दाढ़ी हटानी होगी, चाहे धर्म कुछ भी हो!” यही संदेश दे रही है ट्रंप सरकार की नई ग्रूमिंग नीति, जिसके तहत अमेरिकी सेना में दोबारा दाढ़ी पर बैन लगा दिया गया है।
ट्रंप सरकार के इस फैसले ने धार्मिक आज़ादी और सैन्य अनुशासन के बीच नई बहस छेड़ दी है। खासकर सिख और मुस्लिम समुदाय के सैनिकों में इस फैसले को लेकर गहरी चिंता है।
आदेश जारी: 60 दिन में लागू होगा ‘क्लीन शेव कोड’
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने आदेश जारी करते हुए कहा:
“यह कदम युद्धक क्षमता और अनुशासन को बहाल करने के लिए लिया गया है। अब सेना में ‘फैशन’ की कोई जगह नहीं होगी।”
सभी सैन्य शाखाओं को 60 दिनों के भीतर इस नीति को पूरी तरह लागू करने का आदेश मिला है।
सिख और मुस्लिम सैनिकों के लिए मुश्किल वक्त
इस आदेश का सीधा असर सिख और मुस्लिम सैनिकों पर पड़ेगा जिनके लिए दाढ़ी धार्मिक आस्था का हिस्सा है। अमेरिकी सेना में सिख सैनिकों की संख्या कम है, लेकिन मुस्लिम सैनिकों की संख्या लगभग 6,000 मानी जाती है। अब इन सैनिकों को अपने धार्मिक विश्वास और सरकारी आदेश के बीच कठिन फैसला लेना होगा।
2010 में मिली थी राहत, अब ट्रंप युग में वापसी
2010 से पहले अमेरिकी सेना में दाढ़ी रखना प्रतिबंधित था। फिर ओबामा प्रशासन के दौरान नीति में ढील दी गई और धार्मिक छूट के आधार पर दाढ़ी की इजाज़त दी गई। लेकिन अब ट्रंप सरकार पुराने नियमों की वापसी कर रही है।
“लगता है ट्रंप ‘मेक अमेरिका क्लीन शेव अगेन’ के मिशन पर हैं।”
‘व्यक्तिगत अभिव्यक्ति’ सेना में नहीं चलेगी – रक्षा मंत्री की चेतावनी
रक्षा मंत्री ने कहा कि “सेना में अनुचित व्यक्तिगत अभिव्यक्ति और अजीब शेविंग प्रोफाइल्स को खत्म किया जाएगा।”

यानि कि अब न कोई फ्रेंच कट, न फुल कट, न फैशन कट – बस क्लासिक शेविंग!
कुछ स्पेशल फोर्स यूनिट्स को छूट मिलेगी
हालांकि नियमों में ये भी जोड़ा गया है कि कुछ विशेष सैन्य यूनिट्स — जैसे कि ऑपरेशनल ड्यूटी या स्पेशल फोर्सेज — को सीमित छूट मिल सकती है। बाकी सब के लिए “रोज़ शेव करो वरना शो-कॉज़ नोटिस लो!”
दाढ़ी से खतरा या धार्मिक आस्था से डर?
अगर दाढ़ी सेना के अनुशासन के खिलाफ है, तो क्या मूंछें भी अगला निशाना हैं? क्या जल्द ही हेलमेट में बालों की लंबाई नापने वाले स्कैनर भी आएंगे? और क्या ट्रंप जल्द ही “Clean Shave Soldiers, Clean Conscience Nation” नाम का नया बिल ला सकते हैं?
एक पुरानी कहावत है:
“किसी की आस्था काटना, किसी की दाढ़ी काटने से कहीं ज़्यादा खतरनाक होता है।”
अनुशासन बनाम आस्था, कौन जीतेगा?
इस फैसले ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सेना में अनुशासन धार्मिक स्वतंत्रता से ऊपर है? या फिर ट्रंप प्रशासन सेना को एक जैसी शेविंग और सोच के खांचे में ढालना चाहता है?
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